जीवन बदलाव का नियम है, यदि यह बदलाव सकारात्मक है, तो यह जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। इसी सकारात्मक बदलाव की और अग्रसर होते हुऐ केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागु किया है। निःसंदेह यह एक सराहनीय कदम है।  


nai shiksha niti

नई शिक्षा निति बच्चो के मानसिक विकास को बढ़ावा देगा साथ ही अब यह विषयो को रटने की पद्धिति का त्याग कर उसे समझने के सिद्धांत पर कार्य करेगा। नई शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थीओ मे किर्यात्मक प्रवर्ति को जगाना है, जहां कोई भी बच्चा अपनी क्षमताओं को समझकर उसके अनुसार विषयो का चयन कर सकता है। 


शिक्षा व्यवस्था मे इस बदलाव की बहुत आवश्यकता थी जिसे आखिरकार केंद्र सरकार ने समझा और इस पर कार्य किया। आज जो शिक्षा नीति सरकार द्वारा बनाई गयी है अगर वो सही तरीके से लागु कर दी गई तो निश्चित ही भारत का Education System दुनिया का सर्वोत्तम System बन जायेगा।


भारत सरकार की नई शिक्षा नीति क्या है?


इससे पहले 1986 में नई शिक्षा नीति को लागू किया गया था, जिसमे 1992 में कुछ संशोधन किए गए थे, यानी अब 34 साल बाद इस देश में एक नई शिक्षा नीति को लागू कीया जा रहा है। पूर्व इसरो के प्रमुख श्री के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में सभी विशेषज्ञों की एक समिति ने इसकी रूप रेखा को तैयार किया है।



नई शिक्षा निति को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार 5 August 2020 को अपनी मंज़ूरी प्रदान कर दी। इस नई शिक्षा नीति में स्कूल की शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई प्रकार के बड़े बदलाव किए गए हैं। इस नई शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू करने के लिए केन्द्र ने साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है, चूंकि शिक्षा को संविधान में समवर्ती सूची का विषय माना गया है, जिससे इस पर राज्य और केन्द्र सरकार दोनों का अधिकार होता है।


नई शिक्षा नीति मे 5+3+3+4 क्या है?


अब इसकी शुरुआत हम स्कूली शिक्षा में किए गए बदलाव से करते हैं। नई शिक्षा नीति में पहले जो 10+2 की पंरपरा थी, अब उसे खत्म कर दिया जायेगा। अब उसकी जगह सरकार 5+3+3+4 के फार्मूले को लागु करने की बात कर रही है। 


यहाँ 5+3+3+4  में 5 का मतलब है - की तीन साल प्री-स्कूल (Nursery, LKG, UKG) के और क्लास 1st और 2nd, उसके बाद 3 का मतलब है क्लास 3rd, 4th और 5th उसके बाद के 3 का मतलब है क्लास 6th, 7th और 8th और आख़िर के 4 का मतलब है क्लास 9th, 10th, 11th और 12th, यानी अब इसका मतलब है की बच्चे 6 साल की जगह अब 3 साल की उम्र में फ़ॉर्मल स्कूल को जाने लगेंगे। 


अब तक बच्चे 6 साल में पहली क्लास तक जाते थे, जो अब इस नई शिक्षा नीति के लागू होने पर भी बच्चा 6 साल में पहली क्लास में ही होगा, लेकिन पहले के 3 साल उसके फ़ॉर्मल एजुकेशन वाले होंगे। क्योकि अब प्ले-स्कूल के शुरुआती साल भी स्कूली शिक्षा में जुड़ेंगे, इसका मतलब यह है कि अब राइट टू एजुकेशन का विस्तार होगा। पहले 6 साल से 14 साल के बच्चों के लिए आरटीई लागू किया गया था और अब 3 साल से 18 साल के बच्चों के लिए इसे पूर्ण रूप से लागू किया गया है। यह फार्मूला सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा।


नई शिक्षा नीति में लैंग्वेज फ़ॉर्मूला 


इन सबके आलावा इस नई स्कूली शिक्षा में एक और बड़ी महत्वपूर्ण बात है, भाषा के स्तर पर भी नई शिक्षा नीति में 3 लैंग्वेज फ़ॉर्मूले की बात कही गई है। जिसमें कक्षा पाँच तक मातृ भाषा/ लोकल भाषा में पढ़ाई की बात को कहा गया है, और साथ ही ये भी कहा गया है, कि जहाँ तक संभव हो कक्षा 8 तक इसी प्रक्रिया को अपनाया जाए। 



संस्कृत भाषा के साथ तमिल, तेलुगू और कन्नड़ जैसी भारतीय भाषाओं में भी पढ़ाई पर भी ज़ोर दिया गया है। इसके साथ ही सेकेंड्री सेक्शन में अगर स्कूल चाहे तो वो विदेशी भाषा को भी एक विकल्प के तौर पर दे सकेंगे। इस 3 लैंग्वेज फ़ॉर्मूला मे राज्यों सरकारों को यह अधिकार दिया गया है की वह अपनी क्षेत्रीय भाषा मे शिक्षा दे सकेगे। यहाँ 3 लैंग्वेज फ़ॉर्मूले का केवल यह मतलब है कि तीन भाषाओं में से दो भाषा भारतीय होनी चाहिये।


नई शिक्षा नीति मे बोर्ड एक्ज़ाम की व्यवस्था 


इस नई स्कूली शिक्षा नीति में तीसरी सबसे बड़ी बात बोर्ड परीक्षा में हूऐ बदलाव की है। वैसे तो पिछले 10 सालों में बोर्ड एग्ज़ाम में कई बदलाव किए गए, कभी तो 10वीं की परीक्षा को वैकल्पिक किया गया और कभी नबंर के बजाए ग्रेड्स की बात की गई। लेकिन अबकी बार परीक्षा के तरीक़े में बदलाव की बात इस नई शिक्षा नीति में कही गई है। 


बोर्ड एग्जाम तो होंगे लेकिन अब वो दो बार होंगे और इनको पास करने के लिए अब किसी कोचिंग की कोई ज़रूरत नहीं होगी। इन परीक्षाओं का स्वरूप बदल कर अब इनके माध्यम से छात्रों की 'क्षमताओं का आकलना' किया जाएगा, ना कि उनकी याद करने की क्षमता का, इसके पीछे केंद्र सरकार की यह दलील है, कि इससे नंबरों का दवाब ख़त्म होगा, इसे 2022-23 वाले सत्र से लागू करने की मंशा है। 


इन बोर्ड परीक्षाओं के अतिरिक्त अब राज्य सरकारें कक्षा 3, 5 और 8 में भी परीक्षाएँ लेंगी। इन परीक्षाओं को करवाने के लिए गाइड लाइन बनाने का काम एक नई एजेंसी को सौंपा जाएगा, जो शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत ही काम करेगी। 


नई शिक्षा नीति मे IIT और NEET की परीक्षा


इस नई शिक्षा नीति में अंडर ग्रेजुएट कोर्सस में दाख़िले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से परीक्षा को कराने की बात को कहा गया है। साथ ही अब से रीजनल स्तर पर, राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर भी ओलंपियाड परीक्षाओ को कराने के बारे में कहा गया है, और इन्ही परीक्षाओं को आधार बना कर छात्रों को आईआईटी में प्रवेश देने की बात को कहा गया है। 



उसी तरह से मेडिकल कोर्स में भी बदलाव की बात कही गई है। अब से कोई भी नई यूनिवर्सिटी केवल एक विषय विशेष की पढ़ाई के लिए नहीं बनाई जाएगी, तथा 2030 तक सभी यूनिवर्सिटीओ में अलग-अलग स्ट्रीम की पढ़ाई को एक साथ कराई जाएगी। मेडिकल की पढ़ाई के लिए अलग से Accreditation Policy पॉलिसी को बनाने की बात इस नई शिक्षा नीति में कही गई है।


नई शिक्षा नीति के तहत अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में बदलाव 


इसी तरह के कुछ बदलाव उच्च शिक्षा में भी किए गए हैं, अब ग्रेजुएशन/अंडर ग्रेजुएट में छात्र चार साल का कोर्स पढ़ेगें, तथा किसी कारण वश छात्र को बीच में कोर्स को छोड़ने की गुंजाइश भी दी गई है। पहले साल में कोर्स को छोड़ने पर सर्टिफ़िकेट मिलेगा, दूसरे साल के बाद एडवांस सर्टिफ़िकेट मिलेगा और तीसरे साल के बाद डिग्री, और चार साल के बाद की डिग्री शोध के साथ होगी। 



उसी तरह से पोस्ट ग्रेजुएट में भी तीन तरह के विकल्प होंगे, पहला होगा दो साल का मास्टर्स, ये उनके लिए होगा जिन्होंने तीन साल का डिग्री कोर्स किया है। दूसरा विकल्प होगा चार साल का डिग्री कोर्स शोध के साथ करने वालों के लिए. ये छात्र एक साल का मास्टर्स अलग से भी कर सकते हैं।और तीसरा विकल्प होगा, 5 साल का इंटिग्रेटेड प्रोग्राम, जिसमें  ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों एक साथ हो जायगे।

 

अब पीएचडी करने के लिए अनिवार्यता होगी चार साल की डिग्री शोध के साथ। अब एमफिल को नई शिक्षा नीति में बंद करने का प्रावधान किया गया है। 



उच्च शिक्षा में स्कॉलरशिप के लिए भी नई शिक्षा नीति में प्रस्ताव है, इसके लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की बात कही गई है। प्राइवेट संस्थाएँ, जो उच्च शिक्षा देंगी उनको 25 फ़ीसदी से लेकर 100 फ़ीसदी तक स्कॉलरशिप अपने 50 फ़ीसदी छात्रों को देना होगा - ऐसा प्रावधान इस नई शिक्षा नीति में किया गया है। 


उच्च शिक्षा संस्थानों को ग्रांट देने का काम हायर एजुकेशन ग्रांट्स कमिशन करेगा, जो इसके अलावा इन संस्थाओं के अलग-अलग विभागों के लिए नियम, क़ानून और गाइड लाइन को तैयार करने की ज़िम्मेदारी को भी निभाएगा।


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नई शिक्षा नीति के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु   

    

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर अब शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।
  • जीडीपी का 6 फ़ीसद शिक्षा में लगाने का लक्ष्य जो अभी 1.7 फ़ीसद है।
  • नई शिक्षा का लक्ष्य 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है।
  • छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे, इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी।
  • उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फ़ीसद GER (Gross Enrolment Ratio) पहुंचाने का लक्ष्य है, जो फ़िलहाल 2018 के आँकड़ों के अनुसार 26.3 प्रतिशत है।
  • म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा, इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा।
  • उच्च शिक्षा में 3.5 करोड़ नई सीटें को जोड़ा जायेगा। 

अंत में निष्कर्ष 

 

शिक्षा का महत्व बहुत अधिक होता है, सही तरीके से दी गई शिक्षा जीवन में बदलाव लाने के साथ साथ एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करने में भी साहयक होती है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिये जो स्वयं के निर्माण के साथ दुसरो के निर्माण में भी साहयक बने तभी एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है। इसलिये शिक्षा नीति में किये गये बदलाव निश्चित ही शिक्षा के स्तर को नई उचाईयो तक ले जाने में साहयक होंगे। 


   

 

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